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इंसान हूँ मैं ....

इंसान हूँ मैं लेकिन  फिर भी क्यों निर्मम बन जाता हूँ,  नफ़रत के सागर में  न जाने कितने गोते लगाता हूँ। ममता ,विवेक ,दया और प्रेम  ...

रविवार, 31 दिसंबर 2017

इंसान हूँ मैं ....


इंसान हूँ मैं लेकिन 

फिर भी क्यों निर्मम बन जाता हूँ, 

नफ़रत के सागर में 

न जाने कितने गोते लगाता हूँ।


ममता ,विवेक ,दया और प्रेम 

ये ख़ूबियाँ  मुझे इंसान बनाती हैं ,

फिर भी न जाने क्यों मुझमें 

नफ़रत की चिंगारियां सुलगती हैं। 


अपने दोषों को 

अनदेखा कर ,

औरों के दोष 

दिन-रात गिनता हूँ।  


इंसान हूँ मैं लेकिन 


मेरे ज्ञान और दूरदर्शिता ने 

मुझे सूरज ,चाँद ,तारे दिखाए ,

मेरी भयावह सोच ने 

बर्बादी के काम कराये। 


दर्द बटाना 

मानवता है ,

फिर क्यों देता हूँ 

औरों को दर्द ?


शायद अपनी पहचान 

भूल गया हूँ 

इस बार ख़ुद  को ढूँढ़ूँगा ,

इंसान हूँ मैं 

इंसानियत की ज्योति जलाऊँगा 

नये  साल में नफ़रत की आग बुझाऊँगा। 

@रक्षा सिंह "ज्योति"


15 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात सखी
    शुभ कामनाएँ
    1) नये ब्लॉग के लिए
    2) आँग्ल नव वर्ष के लिए
    इंसान हूँ मैं
    इंसानियत की ज्योति जलाऊँगा
    नये साल में नफ़रत की आग बुझाऊँगा।
    बेहतरीन कविता से शुरुआत....
    गूगल फॉलोव्हर का गैजैट लगाइए
    सादर

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  2. आपकी लिखी रचना आज "पांच लिंकों का आनन्द में" मंगलवार 02 जनवरी 2018 को साझा की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  3. Happy New year mam

    Publish your lines in book format with us: http://www.bookbazooka.com/

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  4. आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद ब्लॉग पर 'मंगलवार' ०२ जनवरी २०१८ को लिंक की गई है। आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

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  5. मानवता का संदेश प्रेषित करती आपकी बहुत प्यारी रचना रक्षा जी। नववर्ष पर सुंदर भाव और विचार प्रेषित करती आपकी लेखनी के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ है।
    खूब लिखिए।
    नववर्ष शुभ हो। यही कामना है।

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  6. इंसानी मन में उठ रहे ज्वलंत सवालों के मध्य चलती मंथन प्रक्रिया बखूबी पेश की आपने, सच कहा खुद को भुलता जा रहा है आज का इंसान.. बहुत अच्छा लिखा है, आपने ...लिखते रहे एवं नववर्ष की ढेर सारी शुभकामनाएं...!

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  7. नफ़रत की आग में सुलगते समाज को इंसानियत अपनाने का संदेश देना उसकी सोइ हुई संवेदना जगाना आज प्रासंगिक है।
    बधाई एवं शुभकामनाऐं।

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  8. वाह
    सुंदर और भावपूर्ण रचना
    शुभकामनाएँ
    सादर

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  9. इस बार ख़ुद को ढूँढ़ूँगा ,
    इंसान हूँ मैं
    इंसानियत की ज्योति जलाऊँगा
    नये साल में नफ़रत की आग बुझाऊँगा।
    .. नेक प्रस्तुति
    आपको भी नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं!

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  10. बहुत ही शानदार रचना।हृदय गदगद हो उठा पढकर।

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  11. सुन्दर सन्देश देती हुती राक्स्हना है ,,,,

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  12. निमंत्रण :

    विशेष : आज 'सोमवार' १९ फरवरी २०१८ को 'लोकतंत्र' संवाद मंच ऐसे ही एक व्यक्तित्व से आपका परिचय करवाने जा रहा है जो एक साहित्यिक पत्रिका 'साहित्य सुधा' के संपादक व स्वयं भी एक सशक्त लेखक के रूप में कई कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं। वर्तमान में अपनी पत्रिका 'साहित्य सुधा' के माध्यम से नवोदित लेखकों को एक उचित मंच प्रदान करने हेतु प्रतिबद्ध हैं। अतः 'लोकतंत्र' संवाद मंच आप सभी का स्वागत करता है। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

    टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

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